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mahabharat 5.129.14-15: कोई भी राजा अपने सम्बन्धियों में फैली फूट को कैसे अनदेखा कर सकता है? हे राजन! अपने सम्बन्धियों में फूट डालने और उनसे अलग होने के कारण आपके सभी शत्रु आपकी हँसी उड़ाएँगे। महाराज! जो समस्या शांति या छल की नीति से दूर हो सकती है, उसके लिए अपने ही सम्बन्धियों को कौन दण्ड देगा?॥14-15॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  5.129.14-15 
कथं हि स्वजने भेदमुपेक्षेत महीपति:।
भिन्नं हि स्वजनेन त्वां प्रहसिष्यन्ति शत्रव:॥ १४॥
या हि शक्या महाराज साम्ना भेदेन वा पुन:।
निस्तर्तुमापद: स्वेषु दण्डं कस्तत्र पातयेत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कोई भी राजा अपने सम्बन्धियों में फैली फूट को कैसे अनदेखा कर सकता है? हे राजन! अपने सम्बन्धियों में फूट डालने और उनसे अलग होने के कारण आपके सभी शत्रु आपकी हँसी उड़ाएँगे। महाराज! जो समस्या शांति या छल की नीति से दूर हो सकती है, उसके लिए अपने ही सम्बन्धियों को कौन दण्ड देगा?॥14-15॥
 
How can any king ignore the divisions spreading among the relatives? O King! All your enemies will laugh at you for creating divisions among your relatives and separating from them. Maharaj! Who will punish your own relatives for a problem which can be overcome by the policy of peace or deception?॥14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)