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mahabharat 5.128.49: ‘कुल के हित के लिए मनुष्य का, ग्राम के हित के लिए कुल का, जनपद के हित के लिए ग्राम का तथा अपने हित के लिए सम्पूर्ण जगत का त्याग कर दो ॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 5.128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.128.49 
त्यजेत् कुलार्थे पुरुषं ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्।
ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
‘कुल के हित के लिए मनुष्य का, ग्राम के हित के लिए कुल का, जनपद के हित के लिए ग्राम का तथा अपने हित के लिए सम्पूर्ण जगत का त्याग कर दो ॥ 49॥
 
‘Abandon a man for the good of a whole family, a family for the good of a village, a village for the good of a district and the entire world for the good of oneself.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)