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mahabharat 5.128.40: भरतनंदन! अपने कुल की रक्षा के लिए कंस को त्यागकर अंधक, वृष्णि आदि सभी यादव एक साथ मिलकर सुखपूर्वक रह रहे हैं और क्रमशः उन्नति कर रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.128.40 
कंसमेकं परित्यज्य कुलार्थे सर्वयादवा:।
सम्भूय सुखमेधन्ते भारतान्धकवृष्णय:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! अपने कुल की रक्षा के लिए कंस को त्यागकर अंधक, वृष्णि आदि सभी यादव एक साथ मिलकर सुखपूर्वक रह रहे हैं और क्रमशः उन्नति कर रहे हैं।
 
Bharatanandan! Having abandoned Kansa for the sake of protection of their clan, all the Yadavas of Andhaka, Vrishni and other clans have united together and are living happily and are making progress gradually.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)