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mahabharat 5.128.35: हे शत्रुओं का दमन करने वाले निष्पाप कौरवों! इस विषय में मैंने उचित कर्तव्य निश्चित किया है, जिसका पालन करने से सबका कल्याण होगा। मैं यह सब तुमसे कहता हूँ, तुम सब लोग सुनो॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 5.128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.128.35 
तत्र कार्यमहं मन्ये कालप्राप्तमरिंदमा:।
क्रियमाणे भवेच्छ्रेयस्तत् सर्वं शृणुतानघा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का दमन करने वाले निष्पाप कौरवों! इस विषय में मैंने उचित कर्तव्य निश्चित किया है, जिसका पालन करने से सबका कल्याण होगा। मैं यह सब तुमसे कहता हूँ, तुम सब लोग सुनो॥ 35॥
 
O sinless Kauravas who suppress the enemies! In this matter I have decided the appropriate duty, which if followed will be beneficial for everyone. I am telling you all about it, you all please listen.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)