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mahabharat 5.128.30: जो मनुष्य धर्म और अर्थ को त्यागकर केवल क्रोध का अनुसरण करता है, वह शीघ्र ही संकट में पड़ जाता है, उसके शत्रु उस पर हँसते हैं ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 5.128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.128.30 
धर्मार्थावभिसंत्यज्य संरम्भं योऽनुमन्यते।
हसन्ति व्यसने तस्य दुर्हृदो नचिरादिव॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धर्म और अर्थ को त्यागकर केवल क्रोध का अनुसरण करता है, वह शीघ्र ही संकट में पड़ जाता है, उसके शत्रु उस पर हँसते हैं ॥30॥
 
He who abandons Dharma and Artha and follows only anger, soon finds himself in trouble, his enemies laugh at him. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)