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mahabharat 5.128.29: क्रोध में भरे हुए दुर्योधन को भाइयों के साथ सभा से जाते देख शान्तनुनन्दन भीष्म ने कहा- ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 5.128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.128.29 
सभायामुत्थितं क्रुद्धं प्रस्थितं भ्रातृभि: सह।
दुर्योधनमभिप्रेक्ष्य भीष्म: शान्तनवोऽब्रवीत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
क्रोध में भरे हुए दुर्योधन को भाइयों के साथ सभा से जाते देख शान्तनुनन्दन भीष्म ने कहा- ॥29॥
 
Seeing Duryodhana, filled with anger, leaving the meeting with his brothers, Shantanunandan Bhishma said - ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)