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mahabharat 5.128.1: वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! दुर्योधन की बातें सुनकर श्रीकृष्ण के नेत्र क्रोध से लाल हो गए। कुछ सोचकर उन्होंने कौरव सभा में पुनः दुर्योधन से इस प्रकार कहा-   |   mahabharat अध्याय 5.128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.128.1 
वैशम्पायन उवाच
तत: प्रशम्य दाशार्ह: क्रोधपर्याकुलेक्षण:।
दुर्योधनमिदं वाक्यमब्रवीत् कुरुसंसदि॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! दुर्योधन की बातें सुनकर श्रीकृष्ण के नेत्र क्रोध से लाल हो गए। कुछ सोचकर उन्होंने कौरव सभा में पुनः दुर्योधन से इस प्रकार कहा-
 
Vaishampayana says- Janamejaya! On hearing Duryodhan's words, Shri Krishna's eyes became red with anger. After some thought, he again spoke to Duryodhan in the Kaurava Sabha in this manner-
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)