श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.127.9 
अपराधो न चास्माकं यत् ते द्यूते पराजिता:।
अजेया जयतां श्रेष्ठ पार्था: प्रव्राजिता वनम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ कृष्ण! यदि अजेय पाण्डव पुनः जुए में पराजित होकर वन जाने को विवश हुए, तो इसमें हमारा कोई दोष नहीं है॥9॥
 
O Krishna, the best among victorious warriors! If the invincible Pandavas were defeated again in gambling and were forced to go to the forest, then it is not our fault.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)