vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय
»
श्लोक 6
श्लोक
5.127.6
न चाहं कंचिदत्यर्थमपराधमरिंदम।
विचिन्तयन् प्रपश्यामि सुसूक्ष्ममपि केशव॥ ६॥
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले केशव! बहुत सोचने-विचारने पर भी मैं अपने छोटे से छोटे पाप को भी नहीं देख पाता हूँ॥6॥
O destroyer of enemies, Keshav! Even after much thought and consideration, I do not see even the tiniest of my sins.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×