श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.127.4 
भवान् क्षत्ता च राजा वाप्याचार्यो वा पितामह:।
मामेव परिगर्हन्ते नान्यं कंचन पार्थिवम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैं देखता हूँ कि आप, विदुरजी, पिता, गुरु या पितामह भीष्म, ये सभी मुझको ही दोषी ठहराते हैं, अन्य किसी राजा को नहीं।॥4॥
 
‘I see that you, Vidurji, father, teacher or grandfather Bhishma, all of them blame only me and not any other king.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)