Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.127.21: वह जीवन भर इसी प्रकार आचरण करे और किसी को कुछ न समझे; यही क्षत्रियों का कर्तव्य है और यही मेरा सदा का मत है॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 5.127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह जीवन भर इसी प्रकार आचरण करे और किसी को कुछ न समझे; यही क्षत्रियों का कर्तव्य है और यही मेरा सदा का मत है॥ 21॥
He should behave in this manner all his life without considering anyone else as anything; this is the duty of the Kshatriyas and this is my opinion forever.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥