Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.127.20: जो लोग अपना कल्याण चाहते हैं, वे मतंग ऋषि के उपर्युक्त वचनों को स्वीकार करते हैं; इसलिए मेरे जैसा मनुष्य केवल धर्म और ब्राह्मणों को ही प्रणाम कर सकता है (शत्रुओं को नहीं)।॥ 20॥ | mahabharat अध्याय 5.127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग अपना कल्याण चाहते हैं, वे मतंग ऋषि के उपर्युक्त वचनों को स्वीकार करते हैं; इसलिए मेरे जैसा मनुष्य केवल धर्म और ब्राह्मणों को ही प्रणाम कर सकता है (शत्रुओं को नहीं)।॥ 20॥
People who seek their own welfare accept the above-mentioned words of sage Matang; therefore, a person like me can bow down only to Dharma and Brahmins (not to enemies).॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥