Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.127.19: वीर पुरुष को सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए और किसी के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए; क्योंकि परिश्रम करना ही मनुष्य का कर्तव्य है। वीर पुरुष चाहे असमय ही मर जाए, परन्तु उसे शत्रु के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए।॥19॥ | mahabharat अध्याय 5.127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।
अप्यपर्वणि भज्येत न नमेदिह कर्हिचित्॥ १९॥
अनुवाद
वीर पुरुष को सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए और किसी के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए; क्योंकि परिश्रम करना ही मनुष्य का कर्तव्य है। वीर पुरुष चाहे असमय ही मर जाए, परन्तु उसे शत्रु के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए।॥19॥
‘A brave man should always strive hard and should never bow down before anyone; because working hard is the duty of a man. A brave man may perish untimely, but he should never bow his head before the enemy.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥