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mahabharat 5.127.18: ऐसा कौन महापुरुष होगा, जो उत्तम कुल में उत्पन्न होकर क्षत्रिय धर्म के अनुसार जीवन व्यतीत करता हो, जो क्षत्रिय धर्म को ध्यान में रखते हुए भी इस प्रकार भयभीत होकर शत्रु के सामने अपना सिर झुका दे?   |   mahabharat अध्याय 5.127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.127.18 
कश्च जातु कुले जात: क्षत्रधर्मेण वर्तयन्।
भयाद् वृत्तिं समीक्ष्यैवं प्रणमेदिह कर्हिचित्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कौन महापुरुष होगा, जो उत्तम कुल में उत्पन्न होकर क्षत्रिय धर्म के अनुसार जीवन व्यतीत करता हो, जो क्षत्रिय धर्म को ध्यान में रखते हुए भी इस प्रकार भयभीत होकर शत्रु के सामने अपना सिर झुका दे?
 
Who would be such a great man, born in an excellent family and living his life according to the dharma of a Kshatriya, who, despite keeping in mind the duty of a Kshatriya, would ever bow his head before the enemy out of fear like this?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)