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mahabharat 5.127.16: जनार्दन! हम क्षत्रियों का यही मुख्य कर्तव्य है कि युद्ध के समय हमें बाणों की शय्या पर सोने का अवसर मिले॥16॥   |   mahabharat अध्याय 5.127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.127.16 
मुख्यश्चैवैष नो धर्म: क्षत्रियाणां जनार्दन।
यच्छयीमहि संग्रामे शरतल्पगता वयम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! हम क्षत्रियों का यही मुख्य कर्तव्य है कि युद्ध के समय हमें बाणों की शय्या पर सोने का अवसर मिले॥16॥
 
Janardan! It is the main duty of us Kshatriyas that we should get the opportunity to sleep on a bed of arrows during the war.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)