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mahabharat 5.127.11: हमने उनका क्या बिगाड़ा है? हमारे किस अपराध के कारण वे पाण्डव सृंजयों सहित हम धृतराष्ट्रपुत्रों को मारना चाहते हैं?॥11॥   |   mahabharat अध्याय 5.127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.127.11 
किमस्माभि: कृतं तेषां कस्मिन् वा पुनरागसि।
धार्तराष्ट्रान् जिघांसन्ति पाण्डवा: सृंजयै: सह॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हमने उनका क्या बिगाड़ा है? हमारे किस अपराध के कारण वे पाण्डव सृंजयों सहित हम धृतराष्ट्रपुत्रों को मारना चाहते हैं?॥11॥
 
What harm have we done to them? For what crime of ours do those Pandavas, along with the Srinjayas, want to kill us, the sons of Dhritarashtra?॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)