श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 126: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.126.18 
घुष्यतां राजधानीषु सर्वसम्पन्महीक्षिताम्।
पृथिवी भ्रातृभावेन भुज्यतां विज्वरो भव॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘सभी राजाओं की राजधानियों में यह घोषणा कर दी जाए कि कौरवों और पाण्डवों का सारा झगड़ा समाप्त हो गया है और उनके सभी कार्य परस्पर प्रेमपूर्वक सम्पन्न हो गए हैं। तब तुम और युधिष्ठिर परस्पर भ्रातृभाव रखते हुए समान रूप से इस राज्य का उपभोग करो, इससे तुम्हारी सारी चिंताएँ दूर हो जाएँगी।’॥18॥
 
‘It should be announced in all the capitals of the kings that the entire dispute between the Kauravas and the Pandavas is over and all their work has been accomplished with mutual love. Then you and Yudhishthira should enjoy this kingdom equally, keeping mutual brotherly feelings, and all your worries will be dispelled.'॥ 18॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि भीष्मद्रोणवाक्ये षड्‍‍विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें भीष्म और द्रोणके वाक्यसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ छब्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)