श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 126: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.126.16 
अर्जुनेन यमाभ्यां च त्रिभिस्तैरभिवादित:।
मूर्ध्नि तान् समुपाघ्राय प्रेम्णाभिवद पार्थिव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! अर्जुन, नकुल और सहदेव - ये तीनों भाई आपको प्रणाम करें और आप उनके माथे को सूंघकर उनसे प्रेमपूर्वक बात करें॥ 16॥
 
O King! Arjuna and Nakula and Sahadeva - these three brothers should bow before you and you should smell their foreheads and talk to them lovingly.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)