vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 126: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको पुन: समझाना
»
श्लोक 14
श्लोक
5.126.14
रत्नौषधिसमेतेन रक्ताङ्गुलितलेन च।
उपविष्टस्य पृष्ठं ते पाणिना परिमार्जतु॥ १४॥
अनुवाद
और तुम्हें अपने पास बिठाकर मैं अपनी रत्नों और औषधियों से भरी लाल हथेली से तुम्हारी पीठ को धीरे से सहलाऊँगा।
‘And making you sit close to me I will gently caress your back with my red palm filled with gems and medicines.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×