श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 126: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.126.13 
ध्वजाङ्कुशपताकाङ्कं दक्षिणं ते सुदक्षिण:।
स्कन्धे निक्षिपतां बाहुं शान्तये भरतर्षभ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘भरतश्रेष्ठ! दक्षिणा देने वाले श्रेष्ठ युधिष्ठिर, संसार में शांति स्थापित करने के लिए ध्वजा, अंकुश और पताकाओं से सुशोभित अपनी दाहिनी भुजा आपके कंधे पर रखते हैं।’ 13॥
 
‘Bharatshrestha! Yudhishthira, the best giver of Dakshina, places his right arm adorned with the flag, handle and banners on your shoulder to establish peace in the world. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)