श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 126: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.126.12 
अभिवादयमानं त्वां शिरसा राजकुञ्जर:।
पाणिभ्यां प्रतिगृह्णातु धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हम चाहते हैं कि आपको प्रणाम करते देखकर महाप्रभु धर्मराज युधिष्ठिर आपको दोनों हाथों से पकड़ लें (और हृदय से लगा लें)।॥12॥
 
‘We want that the great king, Dharmaraja Yudhishthira, seeing you bowing down and saluting you, should hold you with both his hands (and embrace you).॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)