श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  5.125.7-8 
अतिक्रामन् केशवस्य तथ्यं वचनमर्थवत्।
पितुश्च भरतश्रेष्ठ विदुरस्य च धीमत:॥ ७॥
मा कुलघ्न: कुपुरुषो दुर्मति: कापथं गम:।
मातरं पितरं चैव मा मज्जी: शोकसागरे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! केशव के वचन सत्य और अर्थपूर्ण हैं। उनके वचनों, अपने पिता के वचनों और बुद्धिमान विधुर के वचनों की उपेक्षा करके कुमार्ग पर मत चलो। हत्यारे, दुष्ट और मूर्ख व्यक्ति के मोह में मत पड़ो और अपने माता-पिता को शोक के समुद्र में मत डुबोओ। 7-8॥
 
‘Bharatshrestha! Keshav's words are true and meaningful. Do not follow the wrong path by ignoring their words, your father's words and the wise widower's words. Don't be tainted by a murderer, a bad man and an unintelligent person and don't drown your parents in the sea of ​​sorrow. 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)