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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना
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श्लोक 6
श्लोक
5.125.6
आत्मानं च सहामात्यं सपुत्रभ्रातृबान्धवम्।
अहमित्यनया बुद्धॺा जीविताद् भ्रंशयिष्यसि॥ ६॥
अनुवाद
‘अपने अहंकारी मन के कारण तू अपने आपको, अपने पुत्रों, भाइयों, सम्बन्धियों और मन्त्रियों को जीवन से वंचित कर देगा।॥6॥
‘Because of your arrogant mind, you will deprive yourself, your sons, brothers, relatives and ministers of life.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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