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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना
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श्लोक 3
श्लोक
5.125.3
अकृत्वा वचनं तात केशवस्य महात्मन:।
श्रेयो न जातु न सुखं न कल्याणमवाप्स्यसि॥ ३॥
अनुवाद
‘पिताजी! महात्मा केशव की बात न मानने से आप कभी भी सिद्धि, सुख और कल्याण को प्राप्त नहीं कर सकेंगे।॥3॥
‘Father! By not listening to Mahatma Keshav, you will never be able to achieve success, happiness and welfare.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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