श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.125.26 
वासुदेवेन तीर्थेन तात गच्छस्व संशमम्।
कालप्राप्तमिदं मन्ये मा त्वं दुर्योधनातिगा:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पितामह! भगवान कृष्ण को मध्यस्थ बनाकर अब शांति बनाए रखो। मैं इसे तुम्हारा उचित कर्तव्य समझता हूँ। दुर्योधन! मेरी आज्ञा का उल्लंघन मत करो।
 
Father! Make Lord Krishna the mediator and maintain peace now. I consider this to be the appropriate duty for you. Duryodhan! Do not violate my order.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)