श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.125.20 
यावनाथौ चरिष्येते त्वया नाथेन दुर्हृदा।
हतमित्रौ हतामात्यौ लूनपक्षाविवाण्डजौ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि तुम्हारे जैसे दुष्ट सहायक के कारण जब इनके मित्र और मंत्री मारे जाएंगे, तब ये दोनों कटे हुए पंख वाले पक्षियों की भाँति अनाथ (असहाय) होकर भटकेंगे।
 
Because due to an evil assistant like you, when their friends and ministers get killed, these two will wander about orphaned (helpless) like birds with clipped wings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)