श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.125.15 
एतच्चैव मतं सत्यं सुहृदो: कृष्णभीष्मयो:।
यदि नादास्यसे तात पश्चात् तप्स्यसि भारत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पिताजी! भरतपुत्र! यह तुम्हारा कल्याण चाहने वाले श्रीकृष्ण और भीष्म का सत्य मत है। यदि तुम इसे स्वीकार नहीं करोगे, तो पीछे पछताओगे।॥ 15॥
 
‘Father! Bharata's son! This is the true opinion of Shri Krishna and Bhishma who really want your welfare. If you do not accept this, you will regret it later.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)