श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.125.14 
मा जीघन: प्रजा: सर्वा: पुत्रान् भ्रातृृंस्तथैव च।
वासुदेवार्जुनौ यत्र विद्धॺजेयानलं हि तान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘समस्त प्रजा, पुत्र और बन्धुओं को मत मरवाओ। जिनके पक्ष में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन हों, उन्हें युद्ध में अजेय समझो।॥14॥
 
‘Do not get all the subjects, sons and brothers killed. Those on whose side Lord Krishna and Arjun are, consider them invincible in the war.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)