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mahabharat 5.125.10: तात! भगवान श्रीकृष्ण और शान्तनुनन्दन भीष्म ने धर्म और अर्थ से परिपूर्ण बात कही है। नरेश्वर! आप उसे स्वीकार करें। 10॥   |   mahabharat अध्याय 5.125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.125.10 
धर्मार्थयुक्तं वचनमाह त्वां तात केशव:।
तथा भीष्म: शान्तनवस्तज्जुषस्व नराधिप॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तात! भगवान श्रीकृष्ण और शान्तनुनन्दन भीष्म ने धर्म और अर्थ से परिपूर्ण बात कही है। नरेश्वर! आप उसे स्वीकार करें। 10॥
 
‘Tat! Lord Shri Krishna and Shantanunandan Bhishma have said something full of religion and meaning. Nareshwar! You accept him. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)