श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.125.1 
वैशम्पायन उवाच
तत: शान्तनवो भीष्मो दुर्योधनममर्षणम्।
केशवस्य वच: श्रुत्वा प्रोवाच भरतर्षभ॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - भरतश्रेष्ठ जनमेजय! भगवान श्रीकृष्ण के उपर्युक्त वचन सुनकर शान्तनुनन्दन भीष्म ने ईर्ष्या और क्रोध से भरे हुए दुर्योधन से इस प्रकार कहा - 1॥
 
Vaishampayanji says – Bharatshreshtha Janamejaya! Hearing the above words of Lord Shri Krishna, Shantanunandan Bhishma said thus to Duryodhana, who was full of jealousy and anger - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)