श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  5.124.8-9h 
दुर्योधन निबोधेदं मद्वाक्यं कुरुसत्तम॥ ८॥
शर्मार्थं ते विशेषेण सानुबन्धस्य भारत।
 
 
अनुवाद
हे कौरवश्रेष्ठ दुर्योधन! मेरी बात सुनो। भरत! मैं तुम्हें और तुम्हारे बंधु-बांधवों के कल्याण के लिए विशेष उपदेश दे रहा हूँ।
 
Duryodhan, the best of the Kurus! Listen to me. Bharata! I am giving you some advice especially for your welfare along with your relatives. 8 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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