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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना
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श्लोक 58
श्लोक
5.124.58
पश्य पुत्रांस्तथा भ्रातॄञ्ज्ञातीन् सम्बन्धिनस्तथा।
त्वत्कृते न विनश्येयुरिमे भरतसत्तमा:॥ ५८॥
अनुवाद
‘दुर्योधन! अपने पुत्रों, भाइयों, कुटुम्बियों और सम्बन्धियों पर ध्यान दे। ये महान् भरतवंशी तेरे कारण नष्ट न हों॥ 58॥
‘Duryodhan! Look at your sons, brothers, family members and relatives. These great Bharatvanshis should not perish because of you.॥ 58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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