श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  5.124.46-47h 
न चैते तव पर्याप्ता ज्ञाने धर्मार्थयोस्तथा॥ ४६॥
विक्रमे चाप्यपर्याप्ता: पाण्डवान् प्रति भारत।
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! वह तुम्हें विद्या, धर्म और धन देने में समर्थ नहीं है तथा पाण्डवों के समक्ष अपना पराक्रम दिखाने में भी असमर्थ है।'
 
‘Bharatanandan! He is not capable of providing you knowledge, religion and wealth and he is also incapable of displaying his prowess in front of the Pandavas. 46 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)