श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.124.40 
आत्मानं तक्षति ह्येष वनं परशुना यथा।
य: सम्यग्वर्तमानेषु मिथ्या राजन् प्रवर्तते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य सज्जन और शिष्ट लोगों के साथ दुर्व्यवहार करता है, वह उस दुर्व्यवहार से अपने को उसी प्रकार काट लेता है, जैसे कुल्हाड़ी जंगल को काट देती है।
 
O King! He who misbehaves with the virtuous and well behaved people, cuts himself with that misbehavior like an axe cuts a forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)