श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.124.39 
स त्वं तातानुपायेन लिप्ससे भरतर्षभ।
आधिराज्यं महद् दीप्तं प्रथितं सर्वराजसु॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तात भरतश्रेष्ठ! आप समस्त राजाओं में विख्यात होकर इस विशाल एवं तेजस्वी साम्राज्य को अन्यायपूर्वक प्राप्त करना चाहते हैं ॥39॥
 
‘Tat Bharatshrestha! You, famous among all the kings, want to get this huge and bright empire by unfair means. 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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