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mahabharat 5.124.38: प्रजानाथ! विद्वान पुरुष कहते हैं कि तीनों लोकों की प्राप्ति का एकमात्र मार्ग धर्म है। अतः जो मनुष्य धर्म के द्वारा धन और कामना की प्राप्ति चाहता है, वह उसी प्रकार शीघ्रता से उन्नति की ओर बढ़ता है, जैसे सूखे तिनकों में प्रज्वलित अग्नि बढ़ती है।' 38.   |   mahabharat अध्याय 5.124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.124.38 
उपायं धर्ममेवाहुस्त्रिवर्गस्य विशाम्पते।
लिप्समानो हि तेनाशु कक्षेऽग्निरिव वर्धते॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! विद्वान पुरुष कहते हैं कि तीनों लोकों की प्राप्ति का एकमात्र मार्ग धर्म है। अतः जो मनुष्य धर्म के द्वारा धन और कामना की प्राप्ति चाहता है, वह उसी प्रकार शीघ्रता से उन्नति की ओर बढ़ता है, जैसे सूखे तिनकों में प्रज्वलित अग्नि बढ़ती है।' 38.
 
‘Prajanaath! Learned men say that Dharma is the only way to attain the three worlds. Therefore, one who wants to attain wealth and desire through Dharma, progresses quickly in the direction of progress in the same way as the fire burning in dry straws grows. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)