श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.124.37 
कामार्थौ लिप्समानस्तु धर्ममेवादितश्चरेत्।
न हि धर्मादपैत्यर्थ: कामो वापि कदाचन॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धन और कामना की प्राप्ति करना चाहता है, उसे पहले धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि धन और कामना कभी धर्म से अलग नहीं होते॥ 37॥
 
He who wishes to attain wealth and desire must first follow the path of Dharma, because wealth and desire are never separate from Dharma.॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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