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mahabharat 5.124.36: जो दुष्ट मनुष्य इन्द्रियों के वश में होकर लोभ के कारण धर्म का परित्याग कर देता है, वह अयोग्य साधनों से धन और काम के लोभ में पड़कर नष्ट हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 5.124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.124.36 
इन्द्रियै: प्राकृतो लोभाद् धर्मं विप्रजहाति य:।
कामार्थावनुपायेन लिप्समानो विनश्यति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जो दुष्ट मनुष्य इन्द्रियों के वश में होकर लोभ के कारण धर्म का परित्याग कर देता है, वह अयोग्य साधनों से धन और काम के लोभ में पड़कर नष्ट हो जाता है।
 
The wicked man who, under the influence of the senses, abandons Dharma due to greed, gets destroyed by falling into the greed of wealth and lust through unworthy means.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)