श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.124.35 
पृथक् च विनिविष्टानां धर्मं धीरोऽनुरुध्यते।
मध्यमोऽर्थं कलिं बाल: काममेवानुरुध्यते॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
यदि धर्म, अर्थ और काम, जो पृथक्-पृथक् हैं, में से किसी एक को चुनना हो, तो धीर पुरुष केवल धर्म का ही पालन करता है, साधारण पुरुष केवल अर्थ को ही ग्रहण करता है, जो कलह का कारण है और अधम कोटि का अज्ञानी पुरुष केवल काम की प्राप्ति चाहता है॥ 35॥
 
If one has to choose between Dharma, Artha and Kama which are situated separately, then a patient man follows only Dharma, a mediocre man accepts only Artha which is the cause of quarrel and an ignorant man of the lowest category wants to attain only Kama.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)