श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.124.32 
मिथ्योपचरितास्तात जन्मप्रभृति बान्धवा:।
त्वयि सम्यङ्महाबाहो प्रतिपन्ना यशस्विन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे पिता महाबाहो! यद्यपि आपने जन्म से ही अपने भाई पाण्डवों के साथ छल किया है, तथापि वे महाप्रतापी पाण्डव सदैव आपके प्रति हितैषी रहे हैं॥ 32॥
 
Father Mahabaho! Although you have treated your own brothers Pandavas with deceit since birth, yet those illustrious Pandavas have always been well-meaning towards you.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)