श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.124.31 
जन्मप्रभृति कौन्तेया नित्यं विनिकृतास्त्वया।
न च ते जातु कुप्यन्ति धर्मात्मानो हि पाण्डवा:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तुमने जन्म से ही कुन्तीपुत्रों के साथ सदैव बेईमानी का व्यवहार किया है, परन्तु वे कभी इस कारण क्रोधित नहीं हुए; क्योंकि पाण्डव धर्मात्मा हैं॥31॥
 
Since your birth you have always behaved dishonestly with the sons of Kunti, but they have never been angry for this; because the Pandavas are righteous.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)