श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.124.30 
को हि शक्रसमान् ज्ञातीनतिक्रम्य महारथान्।
अन्येभ्यस्त्राणमाशंसेत् त्वदन्यो भुवि मानव:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर आपके अतिरिक्त ऐसा कौन है जो अपने इन्द्र के समान पराक्रमी और बलवान मित्रों और सम्बन्धियों को छोड़कर दूसरों से रक्षा की आशा रखता है?॥30॥
 
Who other than you is there on this earth who, abandoning his friends and relatives who are as valiant and mighty as Indra, would expect protection from others?॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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