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mahabharat 5.124.28: हे भारत! यह पृथ्वी उस मनुष्य को त्याग देती है जो दुष्टों का संग करता है, झूठ बोलता है, अपने परम मित्रों की बात नहीं मानता, दूसरों का पक्ष करता है और अपने ही लोगों से द्वेष रखता है।   |   mahabharat अध्याय 5.124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.124.28 
योऽसत्सेवी वृथाचारो न श्रोता सुहृदां सताम्।
परान् वृणीते स्वान् द्वेष्टि तं गौस्त्यजति भारत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! यह पृथ्वी उस मनुष्य को त्याग देती है जो दुष्टों का संग करता है, झूठ बोलता है, अपने परम मित्रों की बात नहीं मानता, दूसरों का पक्ष करता है और अपने ही लोगों से द्वेष रखता है।
 
Bharata! This earth forsakes the one who keeps company with evil men, is a liar, does not listen to his best friends, favours others and bears enmity towards his own people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)