श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.124.27 
मुख्यानमात्यानुत्सृज्य योनिहीनान् निषेवते।
स घोरामापदं प्राप्य नोत्तारमधिगच्छति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो अपने प्रधान मन्त्रियों को त्यागकर नीच स्वभाव वालों की संगति करता है, वह घोर विपत्ति में फँसकर अपनी मुक्ति का कोई मार्ग नहीं देख पाता॥27॥
 
He who, forsaking his chief ministers, takes the company of men of low character, being trapped in a terrible calamity, cannot see any way of his salvation.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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