श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.124.26 
सतां मतमतिक्रम्य योऽसतां वर्तते मते।
शोचन्ते व्यसने तस्य सुहृदो नचिरादिव॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सज्जनों की सलाह का उल्लंघन करता है और दुष्टों की राय का अनुसरण करता है, उसके मित्र उसे संकट में देखकर शीघ्र ही दुःखी हो जाते हैं।
 
The man who violates the advice of good men and follows the opinion of wicked men, his friends soon become sad when they see him in trouble.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)