Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.124.2: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! नारदजी से ऐसा कहकर धृतराष्ट्र ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा - 'केशव! आपने जो कुछ मुझसे कहा है, वह इस लोक और स्वर्ग में कल्याणकारी है, धर्म के अनुकूल है और न्यायसंगत है।॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 5.124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा तत: कृष्णमभ्यभाषत कौरव:।
स्वर्ग्यं लोक्यं च मामात्थ धर्म्यं न्याय्यं च केशव॥ २॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! नारदजी से ऐसा कहकर धृतराष्ट्र ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा - 'केशव! आपने जो कुछ मुझसे कहा है, वह इस लोक और स्वर्ग में कल्याणकारी है, धर्म के अनुकूल है और न्यायसंगत है।॥ 2॥
Vaishmpayana says - Janamejaya! After saying this to Naradji, Dhritarashtra said to Lord Krishna - 'Keshav! What you have told me is beneficial in this world and in the heaven, in accordance with the religion and is just.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥