| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना » श्लोक 19 |
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| | | | श्लोक 5.124.19  | शमे शर्म भवेत् तात सर्वस्य जगतस्तथा।
ह्रीमानसि कुले जात: श्रुतवाननृशंसवान्।
तिष्ठ तात पितु: शास्त्रे मातुश्च भरतर्षभ॥ १९॥ | | | | | | अनुवाद | | पुत्र! संधि होने पर ही समस्त जगत् का कल्याण हो सकता है। तुम कुलीन कुल में उत्पन्न हुए हो, विनयशील, ज्ञानी और निर्दय हो। अतः हे भरतश्रेष्ठ! तुम्हें अपने पिता और माता के अधीन रहना चाहिए।॥19॥ | | | | ‘Son! Only when a treaty is signed can the whole world prosper. You are born in a noble family, modest, knowledgeable and free from cruelty. Therefore, best of the Bharatas! You should remain under the rule of your father and mother.॥19॥ | | ✨ ai-generated | | |
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