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mahabharat 5.124.15-16h: ऐसा करने से तुम पाप और अपयश देने वाले कर्मों से मुक्त हो जाओगे। इसलिए हे भरतसिंह! तुम ज्ञानी, अत्यंत उत्साही, पराक्रमी, बुद्धिमान और अनेक शास्त्रों के ज्ञाता पाण्डवों के साथ संधि कर लो।॥ 15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  5.124.15-16h 
अधर्म्यादयशस्याच्च कर्मणस्त्वं प्रमोक्ष्यसे।
प्राज्ञै: शूरैर्महोत्साहैरात्मवद्भिर्बहुश्रुतै:॥ १५॥
संधत्स्व पुरुषव्याघ्र पाण्डवैर्भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
ऐसा करने से तुम पाप और अपयश देने वाले कर्मों से मुक्त हो जाओगे। इसलिए हे भरतसिंह! तुम ज्ञानी, अत्यंत उत्साही, पराक्रमी, बुद्धिमान और अनेक शास्त्रों के ज्ञाता पाण्डवों के साथ संधि कर लो।॥ 15 1/2॥
 
‘By doing this you will be freed from the deeds that lead to sin and infamy. Therefore, O lion of the Bharat clan, you should make a treaty with the Pandavas who are knowledgeable, extremely enthusiastic, valiant, intelligent and knower of many scriptures.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)