श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान‍् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  5.124.10-11h 
दौष्कुलेया दुरात्मानो नृशंसा निरपत्रपा:॥ १०॥
त एतदीदृशं कुर्युर्यथा त्वं तात मन्यसे।
 
 
अनुवाद
‘पिताजी! जिसे आप उचित समझते हैं, ऐसे नीच कर्म वे लोग करते हैं जो नीच कुल में उत्पन्न हुए हैं, दुष्ट बुद्धि वाले, क्रूर और निर्लज्ज हैं।॥10 1/2॥
 
‘Father! What you consider to be right, such vile acts are committed by those who are born in lowly families and who are evil-minded, cruel and shameless.॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)