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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना
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श्लोक 1
श्लोक
5.124.1
धृतराष्ट्र उवाच
भगवन्नेवमेवैतद् यथा वदसि नारद।
इच्छामि चाहमप्येवं न त्वीशो भगवन्नहम्॥ १॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - हे नारद! आप जो कह रहे हैं, वह ठीक है। मैं भी यही चाहता हूँ; परन्तु इस पर मेरा कोई वश नहीं है॥1॥
Dhritarashtra said - O Lord Narada! What you are saying is right. I also want the same; but I have no control over it.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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